Friday, January 30, 2009

जीवन क्या है?

प्रेम  का  अप्रेम  से  संघर्ष  है  जीवन
स्वप्न का, संधान का उत्कर्ष है जीवन
मान लो तो जीर्ण, जड़ निष्कर्ष है जीवन
ठान लो तो हर दिवस नववर्ष है जीवन

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